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विशेष लेख: आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां हम दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से एक सेकंड में जुड़ सकते हैं, लेकिन पास बैठे इंसान की आंखों में देखने का समय हमारे पास नहीं है। सोशल मीडिया ने हमें वर्चुअल रूप से तो जोड़ दिया, परंतु भावनात्मक रूप से हम कहीं अकेले होते जा रहे हैं।
रिश्तों की असली मिठास साझा की गई हंसी, दुख-सुख की बातों और साथ बिताए पलों में होती है, न कि स्क्रीन पर चमचमाते इमोजी में। आवश्यकता है कि हम अपनी प्राथमिकताओं को फिर से परिभाषित करें।