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कैप्टन स्मित मच्छर भारतीय पायलट हैं। सितंबर 2026 में दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई गंभीर घटना के बाद उनका नाम दुनिया भर में चर्चा में आया। रिपोर्टों के मुताबिक उड़ान के दौरान सह-पायलट के हमले में स्मित घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, ताकि विमान के भीतर मौजूद दूसरे लोग मदद कर सकें। विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। बाद में दूसरे पायलटों ने विमान को सऊदी अरब के तबुक शहर में सुरक्षित उतारा। उस उड़ान में 174 लोग सवार थे। इस घटना में स्मित के साहस के साथ-साथ यात्रियों, चालक दल और विमान में मौजूद दूसरे पायलटों की भूमिका भी अहम रही।
यह जीवनी उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और स्मित के पहले के एक साक्षात्कार में बताई गई बातों पर आधारित है। यह लेख 2 अक्टूबर 2026 तक प्रकाशित जानकारी के अनुसार अपडेट किया गया है। उनके निजी जीवन के कई विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए यहाँ केवल प्रकाशित और पुष्ट जानकारी दी गई है।
मुंबई से शुरू हुई कहानी
स्मित मच्छर मुंबई के रहने वाले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनका जन्म और पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उनका परिवार कपड़े के कारोबार से जुड़ा था। किशोर उम्र में स्मित ने यह नहीं सोचा था कि वह एक दिन यात्री विमान उड़ाएँगे। उनका शुरुआती रास्ता परिवार के कारोबार और पढ़ाई से जुड़ा था। समाचार रिपोर्टों में बताया गया है कि उन्होंने पहले टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की। इसका संबंध उनके परिवार के कारोबार से था। आगे चलकर उन्होंने कारोबार को बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रबंधन की पढ़ाई भी की।
स्मित ने एक साक्षात्कार में कहा था कि विमान उड़ाना उनका बचपन का सपना नहीं था। कई लोगों को बचपन से ही पायलट बनने का शौक होता है, लेकिन उनके साथ ऐसा नहीं था। पढ़ाई के दौरान उन्हें विमानन क्षेत्र के बारे में जानने का अवसर मिला। एक विमानन सेमिनार में शामिल होने के बाद उनकी रुचि इस क्षेत्र में बढ़ी। उस समय वह लगभग 19 वर्ष के थे। नई जानकारी और एक नए पेशे से परिचय ने उनके भविष्य की दिशा बदल दी। उन्होंने परिवार के कारोबार से जुड़ी पढ़ाई से आगे बढ़कर पायलट बनने के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया।
यह फैसला आसान नहीं था। टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और कारोबार की पढ़ाई से अचानक विमानन में जाना एक बड़ा बदलाव था। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी माँ इस नए करियर को लेकर चिंतित थीं। पायलट बनने के लिए प्रशिक्षण लंबा और महँगा हो सकता है, और नौकरी की राह भी आसान नहीं होती। उनके पिता ने इस फैसले को अपेक्षाकृत शांत ढंग से लिया और उन्हें यह समझने के लिए प्रोत्साहित किया कि पायलट बनने का रास्ता क्या है। परिवार की यह प्रतिक्रिया उनके लिए अहम रही होगी: एक ओर चिंता थी, दूसरी ओर अपने चुने हुए रास्ते को समझने और आगे बढ़ने का अवसर।
पायलट बनने का फैसला
पायलट बनने के लिए स्मित ने न्यूज़ीलैंड में प्रशिक्षण लिया। समाचार रिपोर्टों और उनके साक्षात्कार के आधार पर, प्रशिक्षण के शुरुआती दौर में उन्हें भी नए अनुभवों और जिम्मेदारियों के साथ तालमेल बैठाना पड़ा। विमान चलाना केवल नियंत्रणों को संभालना नहीं है। इसमें मौसम, तकनीकी जानकारी, नियमों, दल के साथ तालमेल और बदलती परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की तैयारी भी शामिल होती है। एक यात्री विमान के पायलट को हर उड़ान में तय प्रक्रियाओं का पालन करना होता है और छोटी से छोटी बात पर ध्यान देना पड़ता है।
स्मित ने अपने प्रशिक्षण के खर्च के बारे में भी एक बातचीत में बताया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि उस समय न्यूज़ीलैंड में उनकी पायलट ट्रेनिंग पर लगभग 16 से 17 लाख रुपये खर्च हुए थे। यह राशि और आज के प्रशिक्षण की लागत अलग हो सकती है; इसे उनके अपने प्रशिक्षण से जुड़ा बताया गया अनुमान समझना चाहिए, सभी पायलटों के लिए एक जैसा नियम नहीं।
न्यूज़ीलैंड में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद स्मित भारत लौटे और स्पाइसजेट में काम शुरू किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने 2011 में स्पाइसजेट में नौकरी शुरू की और वहाँ करीब 11 साल काम किया। इस दौरान उनकी जिम्मेदारियाँ बढ़ती गईं। वह वरिष्ठ पायलट बने और बाद में लाइन ट्रेनिंग कैप्टन की भूमिका में भी काम किया। इस भूमिका में अनुभवी पायलट नए पायलटों को प्रशिक्षण देने और उनकी उड़ान संबंधी तैयारी में मदद करते हैं। यह काम केवल अपने विमान को उड़ाने का नहीं, बल्कि दूसरों को सुरक्षित और तय प्रक्रिया के अनुसार काम करना सिखाने का भी होता है।
स्मित के काम का बड़ा हिस्सा बोइंग 737 विमानों से जुड़ा रहा। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके उड़ान अनुभव का समय अलग ढंग से दर्ज है: कहीं 13 साल से अधिक व्यावसायिक उड़ान अनुभव का उल्लेख है, तो रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में करीब 15 साल के करियर और लगभग 9,750 उड़ान घंटों की बात कही गई है। अक्टूबर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान स्मित ने कहा कि वह 17 साल से उड़ान भर रहे थे और 11 साल से कैप्टन थे। ये आँकड़े अलग-अलग समय पर दी गई जानकारी और गिनती के तरीकों से जुड़े हो सकते हैं, इसलिए इन्हें बिल्कुल एक ही अवधि मानकर नहीं पढ़ना चाहिए। इतना स्पष्ट है कि घटना से पहले तक उनके पास वर्षों का व्यावसायिक उड़ान अनुभव था।
स्पाइसजेट से फ्लाईदुबई तक
स्मित ने भारत में एक दशक से अधिक समय स्पाइसजेट के साथ काम किया। उन्होंने बोइंग 737 बेड़े पर उड़ान भरी और अलग-अलग वरिष्ठ जिम्मेदारियाँ संभालीं। रॉयटर्स के अनुसार, वह 2022 में फ्लाईदुबई से जुड़े। एनडीटीवी ने बताया कि उन्होंने जून 2022 में स्पाइसजेट छोड़ा और फ्लाईदुबई में सीधे कैप्टन के पद पर शामिल हुए। इसे “डायरेक्ट एंट्री कैप्टन” कहा गया—यानी वह कैप्टन के पद पर दूसरी एयरलाइन से आए, उन्हें फ्लाईदुबई में पहले जूनियर पायलट के रूप में काम करके पदोन्नति नहीं मिली थी।
फ्लाईदुबई दुबई की एक विमानन कंपनी है। वहाँ काम करने के लिए स्मित का घर और कामकाजी जीवन भारत से बाहर, दुबई से भी जुड़ गया। एक पायलट का जीवन अक्सर यात्रा और लंबे ड्यूटी समय के इर्द-गिर्द चलता है। फिर भी स्मित ने अपने साक्षात्कार में बताया कि वह काम और निजी जीवन को अलग रखने की कोशिश करते थे। कॉकपिट में वह अपने काम पर ध्यान देना पसंद करते थे; विमान से उतरने के बाद उनका ध्यान परिवार और बच्चों पर रहता था। उन्होंने कहा था कि घर लौटने के बाद वह हर समय विमानन की ही चर्चा नहीं करना चाहते।
यह बात उनके व्यक्तित्व का एक साधारण, मानवीय पक्ष दिखाती है। समाचारों में हम अक्सर किसी व्यक्ति को उसके पेशे या किसी बड़ी घटना से जोड़कर देखते हैं। लेकिन पायलट भी परिवार और रोज़मर्रा के जीवन वाला इंसान होता है। स्मित के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों में उनके परिवार का सीमित उल्लेख है। रिपोर्टों ने उन्हें पत्नी और बच्चों वाला पारिवारिक व्यक्ति बताया, लेकिन उनके बच्चों के नाम और परिवार के निजी विवरण को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया। इसलिए इन बातों के बारे में अटकल लगाना ठीक नहीं होगा।
30 सितंबर 2026 की उड़ान
30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान में 174 लोग सवार थे। रॉयटर्स की 2 अक्टूबर की रिपोर्ट में विमान में कुल 174 लोगों के सवार होने की बात कही गई। अलग-अलग रिपोर्टों में यात्रियों और चालक दल की गिनती का तरीका अलग है, इसलिए यहाँ कुल संख्या को रॉयटर्स के हवाले से दिया गया है। उड़ान के दौरान कॉकपिट में सह-पायलट और कैप्टन स्मित के बीच गंभीर घटना हुई। शुरुआती सरकारी और समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सह-पायलट ने स्मित पर हमला किया और विमान तेजी से नीचे उतरने लगा। घटना के कारण और हमले के पीछे की मंशा की जाँच की जा रही थी। फ्लाईदुबई ने भी जाँच पूरी होने से पहले अटकलें लगाने से बचने की बात कही थी। इसलिए हमले के उद्देश्य के बारे में किसी एक दावे को पक्के तथ्य की तरह बताना उचित नहीं है।
रॉयटर्स के अनुसार, विमान ने 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट की ऊँचाई खो दी। अन्य रिपोर्टों में ऊँचाई के आँकड़े कुछ अलग दिए गए हैं, क्योंकि अलग-अलग प्रणालियों और समय-अंतरालों से माप लिया गया हो सकता है। सभी रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि विमान अचानक तेजी से नीचे आया और स्थिति गंभीर थी। ऐसे समय में उड़ान के चालक दल को विमान, यात्रियों और कॉकपिट की स्थिति पर ध्यान देना होता है।
इस संघर्ष में स्मित गंभीर रूप से घायल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें सिर और हाथों पर चोटें आईं। हमले के दौरान वह कॉकपिट के फर्श पर गिर गए थे। इसके बाद भी उन्होंने दरवाज़ा खोलने के लिए प्रयास किया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ 2 अक्टूबर को हुई वीडियो बातचीत में स्मित ने बताया कि उन्हें लगा विमान नीचे जा रहा था। घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, ताकि बाहर मौजूद लोग भीतर पहुँच सकें। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दरवाज़ा खुलने के बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने सह-पायलट को काबू करने में मदद की।
विमान में मौजूद एक दूसरी फ्लाईदुबई पायलट टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह पायलट यात्री के रूप में विमान में यात्रा कर रहे थे। सह-पायलट को काबू किए जाने के बाद उन्होंने विमान की कमान संभाली और उसे सऊदी अरब के तबुक शहर में उतारा। विमान में सवार लोग सुरक्षित रहे। इस घटना को केवल एक व्यक्ति की कहानी के रूप में देखना अधूरा होगा: स्मित के दरवाज़ा खोलने के प्रयास के साथ-साथ यात्रियों की मदद, चालक दल का काम और दूसरे पायलटों का विमान संभालना भी सुरक्षा के लिए जरूरी था।
घायल हालत में लिया गया कदम
स्मित का कॉकपिट का दरवाज़ा खोलना घटना का सबसे चर्चित हिस्सा बना। वह घायल थे और विमान तेजी से नीचे जा रहा था, फिर भी उन्होंने मदद पहुँचने का रास्ता बनाने की कोशिश की। विमान में कॉकपिट का दरवाज़ा सुरक्षा के लिए बंद रहता है। उस आपात स्थिति में दरवाज़ा खोल पाना यात्रियों और चालक दल को अंदर पहुँचने का अवसर देने वाला कदम था। उपलब्ध रिपोर्टों में कहा गया कि इसके बाद लोगों ने हमलावर को काबू किया और विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने नियंत्रण संभाला। इस पूरी घटना की आधिकारिक जाँच का निष्कर्ष सामने आने से पहले, उसके हर तकनीकी पहलू पर अंतिम दावा नहीं करना चाहिए।
संकट के समय स्मित ने अपने मन को शांत रखने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में बताया कि उस मुश्किल समय में वह प्रार्थना कर रहे थे। यह उनके निजी विश्वास का हिस्सा था। इस विवरण से यह समझ आता है कि बेहद डरावने क्षण में उन्होंने अपने विश्वास के सहारे हिम्मत बनाए रखने की कोशिश की। अलग-अलग समाचारों में उनकी बातचीत के कुछ शब्द अलग ढंग से प्रकाशित हुए हैं, इसलिए यहाँ घटना का सार बताया गया है, शब्दशः कथन नहीं।
परिवार, मित्र और सहकर्मियों की यादें
घटना के बाद उनके मित्रों, सहकर्मियों और परिचितों ने स्मित को शांत, हँसमुख और मदद करने वाला व्यक्ति बताया। रॉयटर्स और अन्य समाचार संगठनों की रिपोर्टों में उनके पुराने परिचितों के हवाले से कहा गया कि वह अपने आसपास के लोगों के साथ सहज रहते थे। कुछ रिपोर्टों ने बताया कि उड़ान प्रशिक्षण के समय भी साथी उनसे सलाह लेने आते थे। इन बातों से उनके बारे में एक ऐसी छवि बनती है जो केवल संकट की घड़ी में दिखाए गए साहस तक सीमित नहीं: वह रोजमर्रा के जीवन में भी साथियों के लिए भरोसेमंद व्यक्ति माने जाते थे।
उनके परिवार ने भी इस कठिन समय में चिंता और राहत दोनों का अनुभव किया होगा। समाचार एजेंसी एपी ने बताया कि एक भारतीय मंत्री ने स्मित के माता-पिता और पत्नी से बात की थी। घटना के बाद भारतीय अधिकारी सऊदी अरब में उनके इलाज और परिवार की सहायता के लिए संपर्क में थे। सार्वजनिक रिपोर्टों में परिवार के निजी विवरण कम हैं, और यह स्वाभाविक है कि परिवार ने इस मुश्किल समय में निजता चाही हो। उनकी कहानी बताते समय उस निजता का सम्मान करना चाहिए।
इलाज और देश-विदेश से मिली प्रतिक्रिया
घटना के तुरंत बाद स्मित का सऊदी अरब के तबुक शहर में इलाज हुआ। भारतीय दूतावास ने बताया कि उनकी हालत स्थिर थी। फ्लाईदुबई के बयान को उद्धृत करते हुए 2 अक्टूबर की रिपोर्टों में बताया गया कि मेडिकल क्लियरेंस के बाद उन्हें संयुक्त अरब अमीरात वापस लाया गया। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी ने अस्पताल से स्मित से वीडियो कॉल पर बात की और उनकी तबीयत पूछी। रॉयटर्स की उसी दिन की रिपोर्ट के अनुसार, उस बातचीत के समय स्मित अबू धाबी के अस्पताल में थे। भारत के प्रधानमंत्री और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से उनके साहस की सराहना की।
भारत में उनके लिए शुभकामनाएँ और प्रार्थनाएँ की गईं। आजतक की खबरों में बताया गया कि मोदी ने वीडियो कॉल के दौरान उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा और उनकी हिम्मत की तारीफ की। दुनिया भर में लोगों का ध्यान इस घटना की ओर गया, क्योंकि विमान में सवार बहुत से लोगों की सुरक्षा खतरे में थी। फिर भी घटना की पूरी जाँच का इंतज़ार जरूरी है। तारीफ करते समय भी हमें उन बातों को अलग रखना चाहिए जो प्रमाणित हैं और उन बातों को अलग जो अभी जाँच का विषय हैं। खासकर हमले की वजह और सह-पायलट की मंशा के बारे में अंतिम निष्कर्ष जाँच के बाद ही निकलेगा।
इस कहानी से क्या समझ आता है
स्मित मच्छर की जीवन-यात्रा बताती है कि करियर का रास्ता हमेशा बचपन में तय नहीं हो जाता। वह परिवार के कपड़ा कारोबार से जुड़े विषय पढ़ रहे थे। फिर एक सेमिनार में विमानन के बारे में जानने के बाद उन्होंने नया रास्ता चुना। उन्होंने विदेश में प्रशिक्षण लिया, भारत की एयरलाइन में काम किया और आगे चलकर दुबई की एयरलाइन में कैप्टन बने। इस सफर में पढ़ाई, प्रशिक्षण, अनुभव और लगातार जिम्मेदारी निभाना शामिल रहा। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि किसी नए क्षेत्र को समझने का अवसर कभी-कभी हमारी सोच और योजनाओं को बदल सकता है।
उनका पेशा भी धैर्य और अनुशासन माँगता है। यात्री विमान में सुरक्षा के लिए पायलट तय प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। स्मित ने अपने साक्षात्कार में कहा था कि विमानन में निर्णय लेने के लिए तैयारी और जिम्मेदारी जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया था कि पायलट का काम केवल उड़ान के दौरान दिखाई देने वाले हिस्से तक सीमित नहीं होता। उड़ान से पहले की तैयारी, तकनीकी जाँच और टीम के साथ तालमेल भी काम का हिस्सा होते हैं। उनके लंबे अनुभव और प्रशिक्षण की भूमिका उस आपात स्थिति में महत्वपूर्ण रही होगी, हालाँकि उस दिन की हर तकनीकी बात की पुष्टि जाँच से ही होगी।
उनकी कहानी यह भी याद दिलाती है कि संकट में एक व्यक्ति के साहस के साथ टीम का सहयोग भी जरूरी है। स्मित ने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने का प्रयास किया। यात्रियों और चालक दल ने हमलावर को रोकने में मदद की। विमान में मौजूद दूसरे पायलटों ने नियंत्रण संभाला। विमान तबुक में सुरक्षित उतरा और उसमें सवार लोग बच गए। इसलिए इस घटना में कई लोगों के तेज़ और जिम्मेदार कदम जुड़े हुए थे।
पायलट की तैयारी और टीम की भूमिका
यात्री विमान में पायलट की जिम्मेदारी केवल विमान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं होती। उड़ान से पहले मौसम, विमान की तकनीकी स्थिति, ईंधन, मार्ग और हवाई यातायात से जुड़ी जानकारी देखी जाती है। कॉकपिट में दोनों पायलट एक-दूसरे की जाँच और पुष्टि करते हैं। सामान्य उड़ान में भी तय प्रक्रियाएँ इसी लिए अपनाई जाती हैं कि निर्णय अनुमान पर निर्भर न रहें। आपात स्थिति में समय कम हो सकता है, इसलिए प्रशिक्षण में अलग-अलग संभावित परिस्थितियों के लिए अभ्यास कराया जाता है।
स्मित मच्छर के करियर के बारे में एनडीटीवी की रिपोर्ट कहती है कि उन्होंने स्पाइसजेट में वरिष्ठ कमांडर और लाइन ट्रेनिंग कैप्टन के रूप में काम किया था। लाइन ट्रेनिंग कैप्टन नए पायलटों के साथ उड़ान अभ्यास करते हैं और यह देखते हैं कि वे नियमों व सुरक्षा प्रक्रियाओं को सही ढंग से लागू कर रहे हैं या नहीं। यह भूमिका अनुभव के साथ-साथ समझाकर सिखाने की क्षमता भी माँगती है। उनके प्रशिक्षण और वर्षों के अनुभव ने उनके पेशेवर जीवन को आकार दिया, हालांकि 30 सितंबर की घटना में किस कदम का क्या तकनीकी असर हुआ, इसका अंतिम निष्कर्ष जाँच से ही स्पष्ट होगा।
विमान की सुरक्षा पूरी टीम की साझा जिम्मेदारी होती है। पायलट, केबिन क्रू, हवाई यातायात नियंत्रक और जरूरत पड़ने पर विमान में मौजूद प्रशिक्षित यात्री—सभी की भूमिका हो सकती है। इस घटना में रॉयटर्स ने बताया कि कॉकपिट का दरवाज़ा खुलने के बाद यात्रियों और चालक दल ने सह-पायलट को काबू करने में मदद की। विमान में मौजूद फ्लाईदुबई पायलटों की दूसरी जोड़ी ने नियंत्रण संभाला और विमान को तबुक में उतारा। इसलिए खबर को केवल एक नायक की कहानी कहने के बजाय उन सभी लोगों के योगदान के साथ समझना जरूरी है।
घटना की जाँच और उपलब्ध जानकारी
कॉकपिट में हुई घटना के बाद अलग-अलग देशों की एजेंसियाँ जाँच से जुड़ीं। शुरुआती खबरों में हमले की आशंका और विमान के तेजी से नीचे आने की जानकारी दी गई। फिर भी किसी संभावित मकसद, योजना या सुरक्षा में चूक को अंतिम तथ्य की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए, जब तक जाँच एजेंसियाँ निष्कर्ष न दें। विमानन घटनाओं की जाँच में उड़ान का डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, संचार, चालक दल के बयान और विमान की तकनीकी जानकारी देखी जाती है। सार्वजनिक रिपोर्टों में इन सभी पहलुओं का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं था।
इस जीवनी में करियर की जानकारी एनडीटीवी की 1 अक्टूबर की रिपोर्ट और घटना की जानकारी रॉयटर्स की 2 अक्टूबर की रिपोर्ट के आधार पर रखी गई है। रिपोर्टों के बीच लोगों की कुल संख्या और कुछ समय-सीमाओं में फर्क हो सकता है। उदाहरण के लिए, रॉयटर्स ने घटना वाली उड़ान में 174 लोगों का उल्लेख किया, जबकि कुछ दूसरे अपडेट यात्रियों और चालक दल को अलग-अलग गिनते हैं। इसी तरह उड़ान अनुभव के साल और घंटों के आँकड़े प्रकाशित होने की तारीख तथा गिनती के तरीके पर निर्भर करते हैं। इसलिए लेख में जहाँ संभव हुआ है वहाँ संबंधित रिपोर्ट का नाम दिया गया है और अपुष्ट निजी विवरण शामिल नहीं किए गए।
स्मित की कहानी पढ़ते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनका स्वास्थ्य और परिवार उनकी निजता का विषय है। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री से बातचीत के समय वह अबू धाबी के अस्पताल में थे। उस बातचीत के बाद आई खबरों में उनकी चिकित्सा और रिकवरी की जानकारी साझा की गई, लेकिन मेडिकल विवरण बदल सकते हैं। उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना के साथ, आगे की स्थिति के लिए एयरलाइन और आधिकारिक बयानों को प्राथमिक स्रोत मानना उचित है।